वह आया
कुछ कदम साथ चला
और फिर हाथ छुड़ा
चला गया।
वह छोड़ गया
कुछ यादें-
खुशहाली के पल,
और कुछ
दर्द में डूबे छण।
इतिहास के पन्नों में
कुछ पन्ने जोड़ गया।
वह दिखा गया आईना।
आतंकवाद हो,
या हो कोई प्राकृतिक आपदा,
ये सब हमसे नहीं जुदा ।
आतूर हैं सब पाने को अधिकार,
पर करते कर्तव्य नहीं ।
सभ्यता पुरानी
पर अब तक हम सभ्य नहीं ।
कभी वह अपने साथ
छुड़ा ले गया
किसी अपने का साथ,
और कभी दे गया हाथ में
किसी अपने का हाथ।
ऐसे कुछ गाढ़े रंग
जीवन में ढार गया।
और
फिर से जीने को नया सबेरा
देकर वह उस पार गया।
"पप्पू" बैठा सोच रहा है !
कैसा था वह,
पर जैसा भी था
वह अपना सा कोई भला गया।
वह आया
कुछ कदम साथ चला
और फिर हाथ छुड़ा
चला गया।
--------पप्पू
No comments:
Post a Comment