एक बात कहूँ, क्या मानोगे?
या अपनी-अपनी ठानोगे!
सूरज को कैसे बाटोगे?
क्या चन्दा को भी काटोगे!
•••••फिर,
ईश्वर को कैसे बाँट दिया?
क्या उसे भी हिस्सों में काट दिया?
फिर किसकी पूजा करते हो?
क्या मन्दिर-मस्जिद में धरते हो!
हिस्से-हिस्से पर लड़ते हो!
कहते हो पर नहीं डरते हो।
जब बाँटी जाए खुशहाली,
कैसे हो ईद औ दिवाली!
"दिवाकर" यह जान नहीं पाता,
क्यों मन्दिर-मस्जिद हैं खाली!
जहाँ बाँटी जाए हरियाली,
वहाँ कैसे रहे उसका "माली"।
-----------दिवाकर ।
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