Saturday, 2 October 2021

मन-का

कुछ इस अदा से ढल गया सूरज,
नज़र में हमेशा के लिए उतर गया सूरज...
तुम भूल जाने की बात करते हो !
यहाँ ज़र्रे ज़र्रे में बिखर गया सूरज !

-------- दिवाकर// 14/07/21

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