वे,
जिन्होंने कुकृत्य किया,
और वे,
जिन्होंने हमें अपशब्द कहा,
उन्होंने जरूर "मेरे" बारे में
नहीं सोचा ।
वह,
जो "मैं" हूँ ,
मैंने भी नहीं सोचा
उन्हें।
और यूँ ही मैंने
उनका प्रतिरोध किया ।
हाँ,
"मैं " प्रहरी हूँ
तुम्हारा ।
और मैं सिर्फ
तुम्हारे लिए सोचता हूँ
कि मैं
स्वयं को भूल जाता हूँ ।
विडम्बना है कि
तुम में "वे" भी आते हैं -
यह वे भूल जाते हैं ।
"मैं" तुमसे हूँ -
मैं यह भूल नहीं पाता ।
हाँ,
मैं प्रहरी हूँ तुम्हारा ।।
-------------------------- दिवाकर । //१९/०७/१६
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