मातृ-सत्ता ही है शाश्वत, गर्भ से उसके- जहाँ, पितृ-सत्ता की बजाते फिरते हो क्यों डफलियाँ? है जगत में प्रेम के रंगों से रंगी हर फिजा, चटख रंग "ममता" के आगे, और रंग फिके यहाँ । -----------------------------दिवाकर ।//08/05/16
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