मेरे हृदय-पटल पर
रेखांकित तेरी तस्वीर।
आज मैं रंग 🎨 भर दूं।
कर दूं उसे सजीव
जरा उमंग भर दूं।
कोमल अधरों पर
भर दू्ं रंग गुलाबी।
रहे छलकती मादकता
मन करें शराबी।
कोमल-चिकने गालों पर
रंग लाल मलूं।
यूं शर्माते-सकुचाते भाव
सजा मचलूं।
रंग नीला,
तेरी आँखों की गहराई में,
रहूँ बैठा मैं उनकी
पलक- परछाईं में।
पिले रंग से
तेरा साज-श्रृंगार करूँ।
उज्ज्वलता का
मैं तेरा अंग-हार करूं।
वदन पे तेरे
हरे रंग की साड़ी डालूँ ,
यौवन की हरियाली को
कुछ और निखारूँ।
काले गहरे रंग से
तेरे केश सजाऊँ।
जिनके साए में जाकर
मैं खुद खो जाऊँ।
अपने अधूरे ख्वाबों में
मैं रंग 🎨 भर दूँ।
कर दूं उन्हें सजीव
जरा तरंग भर दूं।
मेरे हृदय-पटल पर
रेखांकित तेरी तस्वीर,
आज मैं रंग 🎨 भर दूँ।।
*************दिवाकर
//05/03/15
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