हर तरफ हैं वतन पर साजिशो के कशूरवार,
हमारा मत उसको मिले जिसको किए का शर्म है।
मजहबी ठप्पा लगाने जा रहे हो तुम अगर,
भूल जाना यह नहीं कि "वतनपरश्ती" धर्म है।
-------------दिवाकर
//28/10/2015
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