Saturday, 23 July 2016

प्यार तुमने कब किया ?

प्यार तुमने कब किया ?
जलता हुआ दिया था जो,
अपनी लौ में मगन था वो,
उसको तो बस तुमने अपनी
मौजूदगी का हवा दिया।
प्यार तुमने कब किया ?

चाँद था अपने गगन का,
अपनी ही धून में मगन था,
तुमने बादल बनकर
उसको ढक लिया,
जग की नजरों से
उसे ओझल किया।
प्यार तुमने कब किया !

साँझ का अंतिम पहर था,
आगोश में सारा शहर था,
जिसको देखा हमसफर था,
साथ उसके तुमने
कुछ पल हो लिया ।
प्यार तुमने कब किया ?

था समंदर का किनारा,
लहरों की बदमाशियाँ,
शोर की जिद में ही
जिद्दी हो गयी खामोशियाँ।
फिर कहना क्या, क्या सुनना
एक दूसरे का,
बस होंठों का हिलना
नजर मिलना- सब खारा हुआ,
जान न पाए समंदर ने
किसे प्यासा किया ?
प्यार तुमने कब किया ?

कहते हैं सब है शुरू
वहीं से यह सिलसिला,
पर नहीं उतरा जो मन में,
क्या वजूद उसका भला !
दिल ही जाने-
क्या जिया ? कितना जिया ?
प्यार तुमने कब किया ?
               --------------------दिवाकर ।//15/05/16

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