उसने अपने पापों के लिए
माफी नहीं मांगी,
मांगी तो बस सजा।
और किया प्रतीक्षा
सजा मिलने तक
आतुरता के साथ।
उसने राह चलते
बटोरी होंगी न जाने कितनी
दबी दबाई हँसियाँ!
सीने की गठरी में
जैसे बाँधा होगा
न जाने कितने
काँच के टुकड़े-
कितनी चुभन !
यह दुनिया आईना लिए
जो हमेशा खड़ी रहती है
उसके सम्मुख,
उसे कौन बताए कि
उसका आईना हो गया है वह,
जो देखे तो पता चले
उसकी
असलियत ।
------------------ दिवाकर ।//11/06/2016
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