अपना माथा
खुला रखोगे,
औरों को
टोपी पहनाओगे,
तुम नेता बन जाओगे।
सभा करोगे,
जुलूस करोगे,
भीड़ के भीड़ लगाओगे,
तुम नेता बन जाओगे ।
देश की खातिर चिल्लाओगे-
कौन सुनेगा ?
अफजल अफजल चिल्लाओगे,
तुम नेता बन जाओगे ।
घर से दूर
सीमाओं पर
देश की खातिर
कष्ट सहोगे,
जान गँवाओगे,
फिर भी
याद न आओगे।
देश के भीतर
अपने घर से,
देश तोड़ने के
नारे लगवाओगे,
खूब नाम कमाओगे,
तुम नेता बन जाओगे ।
"तीन-रंगों" की
सलामी को
तारीखें ही काफी हैं,
मगर मीडिया में
चर्चा को
ये खबरें नाकाफी हैं ।
दोगे सलामी "खास रंग" को
चर्चा में आ जाओगे,
तुम नेता बन जाओगे।
वजहें जो भी हों-
बेमानी हैं,
जेल से होकर आओगे,
तुम नेता बन जाओगे ।
----------------------------- दिवाकर ।//06/03/16
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