तुम्हारा जन्म का दिवस
न हो कोई त्योहार,
न हो कोई समारोह-व्यवहार,
न हो कोई संकल्प भार,
पर इतना तो जरूर है-
यही दिवस है-
ईश्वर के काल निर्णय से
मेरे लिए ही
चुना गया
ईश्वर का
अप्रतिम
प्रेम उपहार ।
अब
तुम्हारा साथ
मेरे हाथों में तुम्हारा हाथ,
मेरा हर पल,
मेरा रोम-रोम पुलकित,
मेरा तन मन आह्लादित,
मेरा हृदय झूमता है
वरण कर
यह प्रेम का हार।
----------------------- दिवाकर ।// 18/07/2016
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