Saturday, 23 July 2016

गुरु-चेला !

इन्होंने कैसे झट से
"भ्रष्टाचार" के पाँव छू लिये !
इन्होंने एक घंटे
बंद कमरे में
भ्रष्टाचार की सीख
ग्रहण की है।
ये कहते हैं
कि आशीर्वाद मिला है इन्हें
"उनका"।
अब तो राजनीति में
इनका भविष्य उज्ज्वल है ।
जाते जाते
इन्होंने "उनको"
सामाजिक न्यायकर्ता की
उपाधि तक दे डाली !
अब तो कोई संदेह नहीं कि
इन्होंने वह परिपक्वता पा ली है,
जिससे ये
"उनका" अधूरा काम
अवश्य ही पूरा कर पायेंगे।
अगर
कोई जान पाये
कि "वे" बिहार को
कहाँ तक ले गए ,
तो वह जान ले
कि ये देश को
कहाँ तक ले जायेंगे !
--------------------------- दिवाकर ।//02/05/16

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