Tuesday, 26 July 2016

तुम जी गये हो मृत्यु के बाद भी

तुम जी गये हो
मृत्यु के बाद भी,
जैसे निर्भया जी गयी थी।
सब कहाँ जी पाते हैं ऐसे!
तुम सड़कों पर,
अखबारों में,
सोशल साईट्स पर,
टेलीविजन पर
छा गये हो।
जैसे निर्भया छा गयी थी।
सब कहाँ छाते हैं ऐसे!
तुमने लिखा अपना दर्द,
जोड़ा नहीं किसी पर दोष,
पर
दर्द ने तो जोड़ रखा है
दलों से नाता,
यूँ ही नहीं तुम
राजनीति को भा गये हो।
जैसे निर्भया भा गयी थी।
सब कहाँ भाते हैं ऐसे!

तुममे और निर्भया में
सिर्फ आत्महत्या और हत्या का फर्क है,
बाकी सब कुछ एक जैसा।
हाँ एक जैसे ही
तुमसे उपजे कथित
दलीय-दर्द मिट जाएंगे।
राजनीतिक-पटल से हट जाएंगे।
हाँ एक जैसे ही
तुम्हारे दर्द जिन्दा रहेंगे
तुम्हारे बाद की आत्महत्याओं में,
बलात्कारों में, हत्याओं में।
परंतु
राजनीतिक स्वार्थ साधने में
असमर्थ
मरते ही मर जायेंगे।
तुम्हारे जैसे न ही
छा पायेंगे मीडिया में,
न ही लुभा पायेंगे राजनीति को,
वे तब अपने ही दर्द में
दफन हो जायेंगे।
                      -----------दिवाकर ।//20/01/16

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