नारी,
आज का दिन तुम्हारे लिए है,
तुम, जिसने अपने कोख से
जन्मा है संसार।
यही तुम्हारा संसार,
जो गिनता है दिन-
अपनी खुशियों के,
अपने दुःखों के।
जो बिते हुए दिन खींच लाता है,
रोता है, गाता है,
आने वाले दिन के
सपने सजाता है
और
खो जाता है
इतना
कि तुम्हें भूल जाता है ।
इन सब दिनों के बीच
आज का दिन
जरूर फुरसत का दिन होगा
जो तुम्हारे नाम कर दिया।
कितनी अजीब बात है न यह
कि तुम्हारे नाम एक दिन
कि जिसके बिना
हर एक पल अधूरा है ।
पिछले कुछ दिनों से
तुम रोई होगी बहुत,
काश कि आज भी महसूस की जा सकें-
तेरी सिसकियाँ।
तुझे भी "माँ" कहा है हमने-
कि आज के दिन
तेरे आँसू नहीं बहने पाएँ।
आज के दिन "भारत माँ "
तू थोड़ा जी जाए ।
----------------------------दिवाकर ।//08/03/16
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