भीड़ कितनी भी हो
मगर उसमें भी
गुम हो जाने से बचने को
जगह बचती है।
किसी भी गाँठ की
हर आखिरी गिरह
खोल पाने की
जिरह बचती है।
गमों का पहाड़ ही
हो तो क्या
मुस्कुराहट के फुटने की
जुगत बचती है ।
खुदखुशी की वजह क्या होगी
जब खुद से ही
खुश होने की
वजह बचती है ।
दिल बड़ा हो तो
हमेशा ही
जीने की वजह बचती है ।
निराश होते हो भला क्यों यारों,
फिर से होने को
हमेशा ही
सुबह बचती है ।
-------------------- दिवाकर ।//20/03/16
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