Sunday, 12 March 2017

लड़का/वाला


तुम्हारा लड़का होना
और
तुम्हारे कारण
कुछ लोगों का लड़कावाला होना,
बन चुका है धब्बा ,
अब और इसपर
कालीख न पुतवाओ-
तो अच्छा हो।
बीक चुके हो कब के,
अब अपनी
निलामी न करवाओ-
तो अच्छा हो।

यूँ तो
लड़खड़ाने वालों के लिए
लाठी का सहारा
काफी है,
तुम्हें-
जो तनकर चलने की
आदत है
लाठी न तुड़वाओ-
तो अच्छा हो।

सर झुकाना
तुम्हारी आदत में सुमार नहीं,
फिर भी
ठोकर खाकर ही सही
आदत से बाज आ जाओ-
तो अच्छा हो।
        ---------------- दिवाकर ।१३/०९/१६

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