तेरे मौजुदगी का एहसास,
मेरे दोस्त
मेरे विश्वास की आँच है,
जो आँखों से ढलकते
आंसुओं को सोख जाती है।
भोर में खुलते
फूलों की पंखुड़ियों से
छिटकतीं ओस की बुन्दें
हैं तेरी दोस्ती,
मोतियों की तरह
बिखर जाती हैं
मेरे मुस्कराते ही
हर पल मेरे गालों से।
जहाँ कदम लड़खड़ाने लगते हैं
चलते चलते,
वहीं तेरे हाथ बढ़ आते हैं
सहारा देने।
हो न हो कोई फरिस्ता है तू
खुदा का मेरे लिए ।
खून के रिश्ते भी
दिवार बना लेते हैं।
शायद
खून के रंग का रिश्ता है
तेरे-मेरे दरमेयां-
जैसा कि
आकाश और समुन्दर
के बीच होता है-
कभी जो गौर करोगे तो पाओगे-
किस तरह आकाश
समुन्दर में समा जाता है।
------------------------- दिवाकर।०७/०८/१६
Happy Friendship Day to All.....
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