युगों की है उलझन तुम्हारी जुल्फो में, थोड़ा सुलझा लो कि, कुछ लम्हें बिखर जाएँ ।
सुना है- मोतियों का खजाना है छिपा समंदर में। थोड़ा साहिल को मिले कि वह भी सँवर जाए। ---------------------- दिवाकर ।/१८/०८/१६
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