Sunday, 12 March 2017

ख्वाहिश खामोशी की


उन कागजों पे मेरा नाम लिख देना
जिन कागजों का कोई काम ना हो
जहाँ सन्नाटा मिले वहीं फैंक देना
कि कुछ आहट ही हो
यूँ चुपचाप जाऊँ-
मुझपे यह ईल्जाम ना हो।
               ...................... दिवाकर। ०८/०१/१७

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