Sunday, 12 March 2017

मन-का


मेरा कृष्ण
आज
कचड़े से प्लास्टिक चुनता है ,
और बच जाती है गाय
प्लास्टिक खाने से।

मेरा राम,
आज भी
अपने दोस्त -
अनवर, गुरमीत और जाॅन
के साथ एक ही थाली में
खाता है,
एक ही बाॅटल से
पानी पीता है ।

अवकाश में ये सभी
जब एक साथ
किसी बड़े मैदान में
एक-दूसरे के हाथ पकड़कर
गोल चक्कर बनाकर
खेलते हैं,
तब सारा मैदान
उनके घेरे में
सीमटता नजर आता है,
और फिर सारा ब्रह्मांड -
जैसे वहीं सुरक्षित हो।

वर्षों से इंतजार कर रहा हूँ -
जाने कब बड़े होंगे ये,
कि उद्धार मांगता है संसार
एक बार फिर ।
कौन हैं वे लोग -
जो इन्हें बड़ा नहीं होने देते?
कहीं वे अपने ही तो नहीं!
            ------------------------ दिवाकर ।२३/०८/१६

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