उस पल से,
जब तुम्हारे कांधे से
सरका था दुपट्टा,
उस पल से,
जब हमारे दरमियाँ
बस हमारी साँसों का शोर था,
बाकी सब सन्नाटा,
उस पल से,
जब हमारी धड़कनों ने
एक राग छेड़ा था,
उसी पल से
तुमने ओढ़ा है -
मेरे साँसों का दुपट्टा।
कभी अपनी धड़कनों की सुनना
कि वे जानती हैं -
मेरी साँसों ने
कितने बारीकियों से बुना है
इश्क का रिश्ता ।
जरा खयाल रखना कि
मेरी रूह
उन धागों के बीच
बड़े इत्मिनान से फँसी है।
मेरी साँसों का आना-जाना
कि रहे दूपट्टा सजीव,
यह सिर्फ मेरे हिस्से की दास्ताँ नहीं,
तुम्हारा हिस्सा है-
तुम्हारी स्वीकृति-
मेरी साँसों के लिए-
तुम्हारे साँसों की।
--------------------------------दिवाकर ।१९/०८/१६
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