Sunday, 12 March 2017

तुम्हारी पीड़ा में ......


तुम्हारी पीड़ा बाँटने को
मेरे पास वक्त नहीं शेष,
बिक चुका है मेरा वक्त
चंद कौड़ियों के भाव,
अब
मैं बाँटता हूँ चंद कौड़ियाँ,
मैंने इनकी खनखनाहट में
तुम्हारे क्रन्दन को गुम होते देखा है।
जब
कौड़ियों की खनखनाहट
गुम होने लगे,
जब तुम्हारे घाव
हो जाएँ नासूर ,
तब बहा देना उन्हें,
कि
साथ-साथ बह जाएगा
मेरा वक्त (तुम्हारे लिए ),
कि तुम्हें कुछ राहत तो मिले!
        ----------------------------- दिवाकर ।०२/०९/१६

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