यह व्रत जो तुमने रखी मेरे लम्बी उमर जीने के लिए, कुछ खालीपन सा है सदियों से इसमें, भरने के लिए ।
आओ न, मिलकर इसमें कुछ अपनापन भर लें, मिलकर यह व्रत कर लें एक दूसरे पर उमर भर मरने के लिए । ----------------- दिवाकर ।०४/०९/१६
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