Sunday, 12 March 2017

एहसास...यह भी


उस दीवार में
ठोकी गई कील से
आज तक टंग चुके होंगे
कितने कैलेंडर
उन उतरते टंगते कैलेंडरों से
कील मे होती हरकत भर है
नये साल का एहसास
उस दीवार को

बुढ़ी होती दीवार में
दरारें आ रही हैं
कील ढिली पड़ती जा रही है
एक दिन दीवार ढह जाएगी भरभराकर
तब कैलेंडर को मिलेगी
टंगने के लिए
फिर एक नयी दीवार
कील ठोक दी जाएगी
उसके सीने मे।
      ---------------- दिवाकर।०२/०१/१७

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