विसर्जन के पहले
माता की मूर्ति के सम्मुख
भीड़ में
माता को अंतिम प्रणाम कर
भीड़ से बाहर आती हुई माँ
के पैरों का शत्-शत् नमन
करता हुआ मैं
माँ के साथ ही
भीड़ का विसर्जन कर
बाहर निकल आया।
माता की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद
माता का विसर्जन
मूरत सी काठ हुई-
भीड़ ही कर सकती थी।
------------------- दिवाकर ।११/१०/१६
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