भाई सब सही है,...खाली
है न वही बात,...बच्चों वाली,
किसी को एक पन्ना था नापसंद...
तो पुरी किताब जलाली,
कोई चार पदों से हो परेशान...
चरित्र पर मढ़ता फिरता है गाली,
लो फिर कुछ सवाल...
हाँ बस चंद सवालों से...
अपनी जीभ जलाली........,
अपनी आवाज बंद कराली।
............... गौर करो तो
अपना-अपना भरकर पेट..
बाद में सभी बजाते फिरते हैं...
लोकतंत्र की खाली थाली।......
भाई भीड़ लगी है....कौवों की
गाते हैं सब लोकतांत्रिक कव्वाली...
आप भी कर लो काँव-काँव....
आप भी बजा लो ताली।
....................... दिवाकर।
मैं NDTV पर लगे रोक का विरोध करता हूँ.......। मैं हर भीड़तंत्र का विरोध करता हूँ।.....०५/११/१६
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