Sunday, 12 March 2017

मन-का


सारी राह मुझे दुनिया टेढ़ी-मेढ़ी नजर आई,
सारी राह किसी ने भी नहीं गौर किया मेरा चश्मा।
मैं चुप रहा कि मैं
अजनबी ही रहा यहाँ ,
वे चुप रहे कि उनका
यहीं रहा आशियाँ।
              ----------------------------------- दिवाकर । २१/०८/१६

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